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भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के नियम क्या है ?

किडनी ट्रांसप्लांट

आजकल कई तरह की बीमारियां हो रही हैं जो हमारे शरीर पर कोई ना कोई बुरा सर डाल रही है,और हमारा शरीर कमजोर हो रहा है | आजकल का खानपान भी ऐसा हो गए है की जिस से हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है | आज के समय में शरीर के कई अंग भी ज्यादा खराब हो रहे हैं | ऐसे ही किडनी है जो आजकल के टाइम में ज्यादा खराब हो रही है | आपको यह तो पता ही होगा कि अगर किडनी खराब हो जाए तो उसका ट्रांसप्लांट किया जा सकता है यह ट्रांसप्लांट किसी दूसरे व्यक्ति की किडनी लेकर किया जाता है | अब यह सवाल आता है कि किडनी ट्रांसप्लांट तो हो जाता है पर भारत में किडनी ट्रांसप्लांट का क्या नियम है |
आइए जानते इन सब सवालों के जवाब

कौन दे सकता है किडनी

किडनी दो तरह के लोग दे सकता है पहले तो वह लोग जो जीवित होते हैं और अपनी मर्जी से अपनी किडनी दान कर देते हैं क्योंकि एक किडनी दान करने से भी व्यक्ति नॉर्मल जिंदगी जी सकता हैं, और दूसरी वह लोग होते हैं जिनकी किसी कारण से मृत्यु हो जाती है |

क्या होनी चाहिए आयु सीमा

अलग-अलग अंगों को दान करने की आयु सीमा अलग-अलग होती है | ये इस बात पर निर्भर करता है कि दान करने वाल जीवित है या मृत्यु है जीवित व्यक्ति की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए और यह केवल उम्र पर निर्भर नहीं करता यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उस व्यक्ति का शारीरिक स्थिति कैसी है और मृत्यु के बाद इस बात पर तय होता है कि शव का कौन सा अंग दूसरे के लिए उपयुक्त है किडनी और लिवर दान करने की आयु सीमा अधिकतम 70 साल होती है |



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क्या व्यक्ति एक किडनी के साथ जीवित रह सकता है ?

कई लोग होते हैं जो एक ही किडनी के साथ जन्म लेते हैं एक किडनी होने से उनके शरीर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है हमारे शरीर में दो किडनी होती हैं जिनका काम हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है | किडनी हमारे शरीर का ऐसा अंग है जिसका काम शरीर से अपशिष्ट निकालना होता है किडनी हमारे खून से अपशिष्ट को अलग करके उसे पेशाब के जरिए बाहर निकालती है |

लेकिन जब किसी की किडनी खराब होती है तो उसके शरीर में यह प्रकिरिया नहीं हो पाती है | जिस कारण से किडनी ट्रांसफर करना जरूरी होता है | एक किडनी के साथ भी व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है जो किडनी देता है उसको भी कोई परेशानी नहीं होती है बस उसको 6 महीने से 1 साल तक अपने टेस्ट करवाने पड़ते हैं क्योंकि देखना पड़ता है कि उसके मूत्र में प्रोटीन तो नहीं आ रहा है |

कौन दे सकता है कितनी किडनी डोनेशन

केवल परिवार के ही लोग ही किडनी दे सकते हैं जैसे दादा दादी, नाना नानी, माता पिता ,पति पत्नी ,भाई-बहन या बच्चे जिससे आपका खून का रिश्ता हो वही डोनेट कर सकता है | यह भी देखा जाता है कि किडनी डोनर शारीरिक रूप से ठीक है कि नहीं उसको पहले से कोई बीमारी तो नहीं है इसके अलावा यदि कोई अन्य जीवित व्यक्ति अपनी किडनी दान कर रहा है | तो उसको यह सिद्ध करना होता है कि वह जिसके लिए डोनेट कर रहा है उसके साथ उसके भावनात्मक रिश्ते हैं और वह अपनी इच्छा से दान कर रहा है उसको किसी तरीके का कोई आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है |

क्या है भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के नियम

सका पालन करके अंगों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है, जिसे मानव अंग और प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 (HUDA)का नाम दिया गया है. एचयूडीए 1994 के तहत ही सभी अस्पतालों में अंगों का ट्रांसप्लांट किया जाता है.

भारत में किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए एक एक्ट लाए गया है | इस एक्ट के अनुसार ही अंगों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है | यह मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 (HUDA) के तहत कवर किया गया है HUDA 1994 के अनुसार अस्पताल में अंगों का ट्रांसप्लांट किया जाता है | अगर कोई व्यक्ति या अस्पताल इस कानून का पालन नहीं करता तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है यह कानून सभी राज्यों और सभी अस्पतालों में लागू है |

किडनी ट्रांसप्लांट में कितना खर्चा होता है

HUDA 1994 के अनुसार देश में अंगों को खरीद है या बेचे नहीं जा सकता है केवल दान किया जा सकता है | इसलिए यह एक्ट लाया गया है सरकारी अस्पतालों में इसके लिए कोई फीस नहीं है पर दवाइयों आदि पर 3 से ₹4 का खर्चा आता है | प्राइवेट अस्पतालों में भी ट्रांसप्लांट बिना किसी फीस के किया जाता है | पर वहां पर डॉक्टरों की फीस अस्पताल का खर्च ओपीडी फीस दवाइयों आदि का खर्च होता है तो कुल मिलाकर किडनी ट्रांसप्लांट 30 से 35 लाख में होता है |

किडनी निकालने के बाद कितनी देर में हो सकता है ट्रांसप्लांट

जिस व्यक्ति का ब्रेन डेड हो उसकी किडनी 24 से 48 घंटे के अंदर ट्रांसप्लांट की जाती है लेकिन जो व्यक्ति जीवित हो उसकी पहले मेडिकल जांच पूरी होती है और फिर डॉक्टर के कहे अनुसार किडनी ट्रांसप्लांट होती है |

किडनी ट्रांसप्लांट किन अस्पतालों में होता है ?

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सरकारी और प्राइवेट दोनों ही अस्पताल हैं जिसमें दिल्ली का एम्स, सफदरजंग अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल और इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलिअरी साइंसेस है | इसके अलवा देश भर में कई बड़े प्राइवेट अस्पताल हैं जहां बेहतर तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है |