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andhvishwas aur uske piche ka sach

ज़िंदगी शायद बेहद रंगीन होती जो Andhvishwas  ने जड़ें जमायी न होती। आज हर चीज़ के पीछे A ndhvishwas है, ये Andhvishwas नही अँधा विश्वाश है। ये डर है जो जीने नहीं देता उसके ऊपर कुछ लोग हैं जो इन्हें जाने नहीं देते। Andhvishwas  भी ऐसा की सवाल नहीं पूछ पाओगे पूछते ही घर से निकाल दिए जाओगे। शायद मालूम तो उन्हें भी नहीं की ऐसा क्यों करे जा रहे हैं किस और भारत को लिए जा रहे हैं।

जो पहले होता था उसका कारण था, वो जो कर रहे थे वो किसी समस्या का निवारण था। पर मंदबुद्धि मनुष्या को ये समझ ना आया अपने पूर्वजों का उसने मजाक बनाया , समझा वो जो धर्म के ठेकेदारों ने समझाया। हैरानी ये की किसी के भी मन में सवाल भी ना आया। Andhvishwas भी इतने नमन्शील (Flexible ) होते हैं अपनी सुविधा के अनुसार परिवर्तित और अपरिवर्तित होते हैं। जो ठीक ना लगा बदल दिया जो ठीक लगा तो पुराना ही चला दिया।

पहले बात करते हैं Andhvishwas है क्या ?

ऐसा विश्वास जो आँखें बंद कर के किया जाता है उसे Andhvishwas कहते हैं। जैसे आंख खुलती है ये विश्वास खत्म हो जाता है।

बिल्ली को देख के कबूतर आँख बंद कर लेता है और सोचता है की बिल्ली ने उसे देखा ही नहीं इसे बिल्ली का भ्र्म कह लो या उसका Andhvishwas ।

हाल ही में एक घटना सामने आयी एक बाबा ने Corona के इलाज की बात बतायी । ऊपर से बाबा ने बताया की उनका कोई काट नहीं।  लोगों की भीड़ बढ़ी और बाबा की मुसीबत भी कुछ समय बाद बाबा खुद को ‘Corona’ निकला। अगर लोग आँख खोल कर सोचते तो शायद बच जाते।

आज ऐसे ही कुछ विवादों की बात करते हैं समझना किसी को हैं नहीं चलिए पढ़ कर टाइम पास करते हैं। जो समझ आये तो आप महान हो ना आये तो कोई नहीं आप भी उसी भीड़ में खोये लोगों के समान हो।

Andhvishwas aur uske piche ka sach

1 ) जाती प्रथा ( Caste System ) :-

यह एक ऐसी प्रथा है जिस के पीछे क्या कारण है ? किसी को पता नहीं बस लोग इसे मान के जिए जा रहे हैं। इसके पीछे एक कहानी बताई जाती है की जो भगवान के मस्तक से आये हैं उन्हें ब्राह्मण कहा जाता है। ये समाज का नेतृत्व करते हैं और बुध्जीवी होते हैं।

जो भुजाओं से आए वे क्षत्रिय कहलाये ये शासक एवं योद्धा होते हैं। जो जांघों से आए वो वैश्य कहलाये इसमें व्यपारी, किसान आदी आते हैं। अन्त में जो पैरों से आये वो शूद्र कहलाए। ये लोग समाज की सफाई और दूसरे सेवकों वाले काम करते थे।

कारण :-अब सब इसे मान कर जिए जा रहे हैं जबकि हकीकत ये है की लोगों को उनके काम के अनुसार वर्गीकृत किया गया था राजा महाराजों के समय पर और जो जहां और जिस समाज में रहता था उसी समाज का हिस्सा बन जाता था। पर लोगों ने अपनी अक्ल को चलाया और समाज को बाँट दिखाया।

उसमें भी दोगलापन देखिये एक तरह कहते हैं आरक्षण खत्म हो दूसरी तरफ अपनी जाती भी चिपकाये बैठे हैं। क्या आज शूद्र जाती का शिक्षक नहीं है क्या आज एक ब्राह्मण सेवक नहीं है ?

ये सब जो हुआ कहने वाली बातें थी असल में हम सब समान हैं । क्या देखा है कभी की हॉस्पिटल में डॉक्टर की जाती पूछ के इलाज करवाता है कोई ? क्या जब खून की जरूरत होती है तो खून देने वाले की जाती का पता लगाया है कभी ?

नहीं वहां हम ऐसा नहीं कर सकते पर जहां कर सकते है वहां तो करेंगे ही क्योंकि अंधविश्वास लचीला है मर्ज़ी से मोड़ लो।

2) नींबू-मिर्ची लटकाना (Nimbu Mirchi):-

अब कुछ लोग नींबू-मिर्ची लटका के समझते हैं, की ‘नज़र ‘नहीं लगेगी उनके व्यपार को। सोचने लायक बात यह है की ऐसा सिर्फ देसी दुकान वाले ही करते हैं । कभी किसी MNC को देखा है ऐसे करते हुए ? अच्छा जिनकी दुकान चल रही है उनका तो समझ आता है पर जिनकी दुकान चल नई रही वो भी ऐसा करते हैंउन्हें तो उल्टा ये हटा देना चाहिए की किसी की तो नज़र लगे।

कारण :- पहले वायु शोधक ( Air purifier ) नही होते थे तो नींबू-मिर्ची घर के बाहर लगाया जाता था घर की हवा साफ करने के लिए। नींबू और मिर्च दोनों विटामिन सी से भरपूर होते हैं। इसलिए जब इन दोनों के बीच से एक सूती धागे को छेदा जाता है, तो कपास उनके पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेता है और धीरे-धीरे उन्हें हवा में वाष्पित कर देता है। साथ ही यह कीड़े मकोड़ों को भी अंदर आने नहीं देता ।

3) मंगलवार ब्रस्पतिवार और शनिवार को बाल ना धोना :-

कहते हैं की इन दिनों बाल धोने से आप के ‘ग्रह खराब होते हैं’ और आप के “भाई या पापा” आदि को नुकशान देता है। यानी की करें आप और लगेगा आप के भाई को और सिर्फ बाल धोने से ही ग्रह खराब हो जाते तो जो लोग स्विमिंग करते हैं उनके तो ग्रह डूब जाने चाहिए।

कारण :- पहले के लोग पानी और पर्क्रतिक का बहुत ध्यान रखते थे अन्तः वो ऐसे कर के पानी बचाते थे। यानी अगर केजरीवाल जी ने ओड इवन पहले निकाला होता तो आज ये भी एक अंधविश्वास होता। कारण तो कोई बताता नहीं पर हाँ हमारा पर्यावरण तो बच जाता ।
 4) नदी और तालाब में सिक्का डालना :-


लोग एक रूपये का सिक्का पानी में डाल कर करोड़ों की डील कर आते हैं हद तो तब होती है जब उम्मीद भी करते हैं की वो एक का सिक्का कमाल दिखायेगा और उनके कर्मों से नहीं उस एक रूपये के सिक्के से उनका काम बनेगा।

 कारण :- पहले सिक्के तांबे (copper) के होते थे। ताम्बा प्योरीफायर का काम करता है । अन्तः यह तालाब के पानी को साफ करता था। उस तालाब के पानी को पीने से पेट की गंदगी साफ, रक्त शुद्ध तथा कोलेस्ट्रॉल में कमी आती थी ।
अंतः लोग सिक्के को पानी को साफ करने के लिए डाला करते थे पर समय के साथ ये रिवाज भी बदल गया और लोगों ने इसे अन्धविश्वास के साथ जोड़ दिया।
 
5) बिल्ली का रास्ता काटना :-


अगर बिल्ली रास्ता काट ले तो आप के सब काम रुक जायेंगे। आप का नुकसान होगा। किसी ने पूछा कैसे, तो कारण तो किसी को भी नहीं पता, बस है तो है चुप चाप मनो, क्योंकि हम भी मान रहे हैं।

कारण :- पुराने जमाने में जानवर से बनी गाड़ी होती थी जैसे घोड़ा गाड़ी , बैल गाड़ी। तो होता ये था की जब अँधेरे में कहीं जाते थे तो बिल्ली बिलकुल शेर जैसी लगती थी आँखों से, तो चलाने वाले को हिदायद दी जाती थी की ऐसा कुछ दिखे तो रुक जाना एक तो जान बच जाएगी दुसरा जानवर डर के यहां वहां नहीं भागेंगे।

6) रात को नाख़ून नहीं काटने चाहिए :-

इसका किसी ने आज तक कारण तो नहीं बताया पर हाँ ये सुना है की रात को लक्ष्मी घर आती है और उस समय नाख़ून काटने से लक्ष्मी घर नहीं आती।

 कारण :- पुराने समय में ना तो बिजली होती थी और ना ही हर समय उजाला (light ) होता था । लोग बस सूर्य की रोशनी पर ही निर्भर रहते थे। साथ ही नेल कटर भी लोगों के पास उपलब्ध नहीं था।

उस समय में लोग नाखून या तो चाकू से काटते थे या किसी धारदार औजार से। इसीलिए यह कहा जाता था कि नाखून दिन के समय में ही काटें जिससे कि हमारे हाथों को किसी भी प्रकार की हानि ना हो।

 देखा आप ने andhvishwas aur uske piche ka sach कितना अलग और अच्छा है।

7) रात में पीपल के पेड़ के पास न जाएं :-

रात को पीपल के पड़े के नीचे जाओगे तो “भूत घर ले कर लौट आओगे”। पीपल में भूत होता है ऐसा ही सूना होगा आपने भी। पर सच ये नहीं है।

 कारण :- पेड़ रात के समय कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। इसलिए, उनके पास जाने को मना किया जाता था।

इस Andhvishwas में कोई सच्चाई नहीं है कि पीपल के पेड़ में आत्माओं और भूतों का निवास होता है, वे उस दौरान आपको डरा सकते हैं।

8) अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद स्नान करना अनिवार्य है :-

शमशान में आत्मा होती है जो घूमती रहती है और वो आप पे लग कर आप के घर आ सकती है। घर पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

 
कारण :- मृतक का शरीर किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया या संक्रमण ( bacteria or infections) का घर हो सकता है और एक बार अंतिम संस्कार (funeral ) करने के बाद, संक्रमण हवा में फैल जाता है। इसलिए तुरंत नहा कर आप भूत से नहीं संक्रमण से अपने परिवार को बचाते हैं।
 
9) शाम के समय झाड़ू ना मारें :-

यह माना जाता है की रात या शाम को झाड़ू लगाने लक्ष्मी घर से चली जाती है। इस वजह से लोग रात को झाड़ू नहीं लगाते।

कारण :- पुराने समय में ना तो बिजली होती थी और ना ही हर समय उजाला (light ) रहता था । लोग बस सूर्य की रोशनी पर ही निर्भर रहते थे। अन्तः यह माना जाता था की अँधेरे में झाड़ू लगाने से जरूरी सामान , काग़ज़ आदि खो सकते हैं। गलती से हम उन्हें बाहर भी फ़ेंक सकते है अन्तः इन सब से बचने के लिए ऐसा कहा जाता था पर लोगों ने अपने मतलब से इसे बदल दिया।
 
10) विविध (miscellaneous) :-

अब इनके पीछे लॉजिक (logic ) का पता तो भगवान ही जाने। जैसे ३ तिगाड़ा काम बिगाड़ा , घर में सीटी (Whistle) बजाने से गरीबी आती है , पैर हिलाने से धन हानि होता है।

आँख फड़फड़ाना (Eye twitching) इसमें भी लोगों को ऑप्शन दिया गया है। यह माना जाता है कि दाईं आंख फड़कना पुरुषों के लिए अच्छा है, और बाईं ओर महिलाओं के लिए।

पता नहीं कौन बताएगा andhvishwas aur uske piche ka sach वो सच जो जीवन को बदल सकता है। वो सच जो भाई को भाई से जुदा होने से बचा सकता है।

Andhvishwas तब तक अंध है जब तक आप सवाल नहीं पूछते तो चलिए टटोलिये अपना दिल लगाइये दिमाग और चलिए चल पड़ते हैं एक नए भारत की ओर।

जैसे माँ भच्चे को डरा के उस से काम करवाती है वैसे ही हमारे पूर्वजो ने भी सोचा पर कहाँ हम लोग अपने ही मतलब निकाल के बैठ गए। सोचिये तो PK और OMG जैसी फिल्में देखते हैं तारीफ करते हैं पर उन्हें भूल भी जाते हैं।

ऐसे आप ने भी कई सुने होंगे और हमें आप से सुनने में बड़ा मज़ा आएगा। देखें किस के घर में क्या चल रहा है ।

आप नीचे कमेंट करना भूलें ना कुछ गलत लगा हो तो हमें बताएं।