Home Motivation जनिए कौन है द्रौपदी मुर्मू | Draupadi Murmu family hindi

जनिए कौन है द्रौपदी मुर्मू | Draupadi Murmu family hindi

जनिए कौन है द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu family Hindi)

भारत में राष्टपति चुनाव होने जा रहे है | 29 जून को नामांकरण(Enrollment), 18 जुलाई को मतदान(polling) और 21 जुलाई को नतीजा आएगा |

ऐसे में राजनीति के गलियारों में यह चर्च हो रही है की

कौन होगा अगला राष्टपति ?

ऐसे में बीजेपी ने अपनी ओर से एक नाम की घोषण कर दी है “द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ” |

जी हाँ बीजेपी ने द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) का नाम दिया है | 

कौन है द्रौपदी मुर्मू (Kaun hai Draupadi Murmu /Draupadi Murmu Biography)

द्रौपदी मुर्मू झारखण्ड की पहली महिला आदिवासी राज्पाल थी वह सबसे लम्बे समय तक 6 वर्ष तक राज्पाल बनी रही उनका कार्यकाल 18 मई 2015 से 12 जुलाई 2021 तक रहा |

उन्होंने अपने कार्यकाल में  बहुत अच्छे से कार्य किये | जिनके लिए उनकी काफी सरहाना भी हुयी |

द्रौपदी मुर्मू का बचपन ( Draupadi Murmu ka Bachpan /Draupadi Murmu Biography early age)

 द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को उड़ीसा राज्य के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर के बैदोपोसी गाँव में एक आदिवासी परिवार में हुआ था।

द्रौपदी मुर्मू के पिता का नाम बीरांची नारायण तुडु था | द्रौपदी मुर्मू  तीन भाई  बहन थे |

उन्होंने 7वीं तक की पढाई गाँव में की और आगे की रामा देवी वोमेंस विश्वविद्यालय, भूनेश्वर में की |

 उनका विवाह श्याम चरण मुर्मू के साथ हुआ | उनके 3  बच्चे हुए दो पुत्र और एक पुत्री

मुर्मू का जीवन कठिनाइयों से भरा रहा |

किस्मत नें उन्हें तोड़ने कोशिश की पर वो हर बार और निखर कर सामने आती रहीं। जवानी में ही वो विधवा हो गयी कुछ समय बाद ही उनके दोनों बेटों की मौत हो गयी।

पर चट्टान जैसा मजबूत जिगरा रखने वाली द्रौपदी को वक्त और हालत नहीं तोड़ पाए। उन्होंने ना सिर्फ खुद को सम्भाला बल्कि अपनी बेटी और पुरे परिवार को सम्भाला।

कौन है द्रौपदी मुर्मू (Kaun hai Draupadi Murmu /Draupadi Murmu Biography)

 द्रौपदी मुर्मू का राजनीतीक करियर (Draupadi Murmu political career)

द्रौपदी मुर्मू ने शुरुआत में श्री अरबिंदो इण्ट्रेग्रल एडुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम किया।

उसके बाद उड़ीसा सिंचाई विभाग में एक कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant) के रूप में काम किया ।

1997 द्रौपदी मुर्मू ने अपने राजनीतीक करियर की शुरुआत की। वो रायरंगपुर नगर पंचायत के चुनाव में वॉर्ड पार्षद चुनी गईं और नगर पंचायत की उपाध्यक्ष बनाई गईं।

उसके बाद वे राजनीति मे लगातार आगे बढ़ती चली गईं और रायरंगपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर दो बार (साल 2000 और 2009) विधायक भी बनीं।

2000 से 2004 तक नवीन पटनायक के मंत्रिमंडल में वे राज्यमंत्री भी रहीं.



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उन्होंने मंत्री बनने के बाद वाणिज्य(Commercial Department) ,परिवहन विभाग(transport Department) और मत्स्य पालन (Fisheries) के अलावा पशु संसाधन विभाग(animal resources department) भी संभाला।

तब नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) और बजेपी ओड़िशा मे गठबंधन की सरकार चला रही थी।

उन्हें 2007 में ओडिशा विधान सभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए “नीलकंठ पुरस्कार” से सम्मानित किया गया था।

2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

वह पहली ऐसी उड़िया नेता हैं, जिन्हें किसी राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के कुछ अहम निर्णय (Draupadi murmu tough decision achievements )

इनके तो पुरे ही जीवन से आप को सीखना चाहिए पर राज्यपाल रहते इन्होने कुछ ऐसे निर्णय लिए की आप भी इनके मुरीद हो जायेंगे।

द्रौपदी मुर्मू ने 18 मई 2015 को झारखंड की पहली महिला और आदिवासी राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। वह छह साल, एक महीना और 18 दिन तक इस पद पर रही।

वह झारखंड की पहली राज्यपाल थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत से बड़े बड़े फैसले लिए जिसके लिए उनकी आज भी सरहाना की जाती है।



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2017 झारखंड में बीजेपी के नेतृत्व वाली रघुबर दास की सरकार ने अदिवासियों की ज़मीनों की रक्षा के लिए ब्रिटिश हुकूमत के वक़्त बने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) के कुछ प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कराया।

परन्तु जब इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा गया। तब राज्यपाल रहीं द्रौपदी मुर्मू ने मई 2017 में यह विधेयक बगैर दस्तखत सरकार को वापस कर दिया और पूछा कि इससे आदिवासियों को क्या लाभ होगा।

सरकार इसका जवाब नहीं दे पाई और यह विधेयक क़ानूनी रूप नहीं ले सका।

उसी सरकार के कार्यकाल के दौरान जब पत्थलगड़ी विवाद हुआ, तो द्रौपदी मुर्मू ने आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के तहत बने ग्राम प्रधानों और मानकी, मुंडाओं को राजभवन में बुलाकर उनसे बातचीत की और इस मसले के समाधान कि कोशिशें की।

राज्यपाल रहते हुए वे स्कूलों-कॉलेजों में जाती रहती थी। इस कारण कई स्कूलों की ग्रोथ हुयी।

उन्होंने साल 2016 में विश्वविद्यालयों के लिए लोक अदालत लगवायी और लोगो के विरोध के बावजूद चांसलर पोर्टल को शुरू कराया इससे विश्वविद्यालयों में नामांकन समेत बाक़ी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने लगी।

वे वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से भी विभिन्न कुलपतियों (Vice Chancellors) से संवाद करती रहीं।

उन्होंने जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई को लेकर लगातार निर्देश दिए। इसके कारण विश्वविद्यालयों में लंबे वक़्त से बंद पड़ी झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की नियुक्ति फिर से होने लगी।

राज्यपाल रहते हुए द्रौपदी मुर्मू ने सभी धर्मो को राजभवन में आने की एंट्री दी।

अगर जीतीं तो सबसे युवा और देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बन सकती हैं मूर्मू 

मुर्मू अगर जीतती हैं तो 25 जुलाई को उनका शपथ ग्रहण होगा । उस दिन उनकी उम्र 64 साल 35 दिन होगी और वह दूसरी युवा राष्ट्रपति होंगी फिलहाल सबसे युवा राष्ट्रपति बनने का रिकॉर्ड नीलम संजीव रेड्डी के पास है।

रेड्डी जब राष्ट्रपति बने थे उस वक्त उनकी उम्र 64 साल दो महीने 6 दिन थी। साथ में मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति होंगी । उनसे पहले प्रतिभा देवी सिंह पाटिल देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं।

उम्मीद करता हूँ जनिए कौन है द्रौपदी मुर्मू Draupadi Murmu family hindi आप को प्रेणा देगा की पिकामयाबी पितृ सम्पति से नहीं बल्कि भुजबल से आता है।