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ISRO के नए SSLV रॉकेट की लॉन्चिंग सफल, लेकिन सैटेलाइट्स से संपर्क टूट गया | ISRO SSLV-D1/EOS-02 launch live

ISRO

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार सुबह 9.18 पर आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से अपना पहला नया रॉकेट स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) D1 लॉन्च किया ,और एक  नया इतिहास रच दिया है | रॉकेट ने सही तरीके से काम करते हुए दोनों सैटेलाइट्स को उनकी निर्धारित कक्षा में पहुंचा दिया रॉकेट अलग हो गया |

  लेकिन उसके बाद सैटेलाइट्स से डेटा मिलना बंद हो गया |

ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा  है की हम डेटा लिंक हासिल करने की पूरी कोशिस कर रहे है |  हम जैसे ही लिंक स्थापित कर लेंगे, देश को सूचित करेंगे | 

EOS-02 और आजादी सैटेलाइट की क्या खासियत

  EOS02 एक अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट हैं यह 10 महीने के लिए अंतरिक्ष में काम करेगा  |

इसका वजन 142 किलोग्राम है,  इसमें मिड और लॉन्ग वेवलेंथ इंफ्रारेड(Mid and Long Wavelength Infrared) कैमरा लगा है |इसका रेजोल्यूशन 6 मीटर तक है , यह रात में भी निगरानीरखा सकता है |

इसमें 50 ग्राम औसत वजन के 75 उपकरण हैं | इसे ग्रामीण भारत के सरकारी स्कूलों की छात्राओं ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर ISRO के वैज्ञानिकों की मदद से बनाया है | 

स्पेस किड्स इंडिया के विद्यार्थियों की टीम ने धरती पर प्रणाली तैयार की जो उपग्रह से डाटा रिसीव करेगी | यह सैटेलाइट नई तकनीक से लैस है जो कि फॉरेस्ट्री, एग्रीकल्चर, जियोलॉजी और हाइड्रोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम करेगा | 

SSLV क्या है ?

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle – SSLV) ,यानी अब छोटे सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग के लिए इस रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा | यह एक स्मॉल-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल है |

  इसके जरिए धरती की निचली कक्षा (Lower Earth Orbit) में 500 किलोग्राम तक के सैटेलाइट्स को निचली कक्षा यानी 500 किलोमीटर से नीचे या फिर 300 किलोग्राम के सैटेलाइट्स को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में भेजा जाएगा |

सब सिंक्रोनस ऑर्बिट की ऊंचाई 500 किलोमीटर के ऊपर होती है | 

 नया SSLV रॉकेट कितना लंबा-चौड़ा है 

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle – SSLV) की लंबाई 34 मीटर( 112 फीट) है |  इसका व्यास(Diameter) 6.7 फीट है, कुल वजन 120 टन है | यह PSLV रॉकेट से आकार में बहुत छोटा है |

  इसमें चार स्टेज हैं, इसके तीन स्टेज सॉलिड फ्यूल से चलेंगे,  और चौथा स्टेज लिक्विड ईंधन से प्रोपेल होगा | 

पहला स्टेज 94.3 सेकेंड, दूसरा स्टेज 113.1 सेकेंड और तीसरा स्टेज 106.9 सेकेंड जलेगा | 

PSLV का लोड होगा कम इस रॉकेट की लॉन्चिंग से 

SSLV रॉकेट की लॉन्चिंग से PSLV छोटे सैटेलाइट्स के लोड से मुक्त हो जायेगा क्योंकि वह सारा काम अब एसएसएलवी करेगा |

ऐसे में पीएसएलवी को बड़े मिशन के लिए तैयार किया जाएगा | 



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क्या यह भविष्य में बढ़ते स्माल सैटेलाइट मार्केट के लिए उपयोगी है 

हाँ यह भविष्य में बढ़ते स्माल सैटेलाइट मार्केट और लॉन्चिंग SSLV-D1 के लिया  उपयोगी होगा | 

इसकी लॉन्चिंग के बाद से विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ जाएगी |  SSLV अपने साथ 500 किलोग्राम वजनी पेलोड ले जाने में सक्षम है, जो कि 500 किलोमीटर की ऊंचाई की कक्षा में सैटेलाइट स्थापित करेगा |

जबकि इसकी तुलना में PSLV 1750 वजनी पेलोड को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट यानी 600 किलोमीटर ऊपर कक्षा में स्थापित कर सकता है | 

SSLV के फायदे क्या है 

  • यह सस्ता और कम समय में तैयार हो सकता है | 
  • 34 मीटर ऊंचे SSLV का व्यास (Diameter) 2 मीटर है, 2.8 मीटर व्यास((Diameter)) का PSLV इससे 10 मीटर ऊंचा है | 
  •  यह SSLV छोटे सैटेलाइट को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने में सक्षम होगा | 
  • SSLV की लॉन्चिंग से पावरफुल PSLV छोटे सेटेलाइट्स के लोड से मुक्त हो जायेगा |  क्योंकि वह सारा काम अब SSLV ही  करेगा |