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मंकीपॉक्स : क्या होते हैं और इसके लक्षण | Mankeepoks Kya Hote Hain aur Isake Lakshan

अभी दुनिया कोविड जैसी महामारी से उभरी भी नही है की तभी एक और बीमारी आ गई है मंकीपॉक्स ।

 हालांकि भारत में अभी तक इससे संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन ब्रिटेन, इटली, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और अमेरिका में लोग इससे संक्रमित पाए गए हैं। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस इस बीमारी की जांच कर रहे हैं

जिनमें मृत्यु दर 10 प्रतिशत हो सकती है। कुल मिलाकर, मंकीपॉक्स के 100 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं।

आइए जानते है मंकीपॉक्स के बारे में 

 क्या है मंकीपॉक्स ?( Mankeepoks Kya Hota Hai)



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मंकीपॉक्स एक चेचक(chicken pox) की तरह का वायरस है | लेकिन इसमें अलग

तरह का वायरल संक्रमण होता है | ये पहली बार 1958 में एक बंदर में पाया गया था | बाद में 1970 में पहली बार इंसान में पाया गया था मंकीपॉक्स वायरस पॉक्सविरिडे (Poxviridae) परिवार में ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से संबंधित है |

ये वायरस  मध्य और पश्चिम अफ्रीका के वर्षा वन इलाकों में पाया जाता है और कभी कभी अन्य क्षेत्रों में पहुंच जाता है।

मंकीपॉक्स कैसे फैलता है ?

मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति या संक्रमित जानवर के पास जाने या उनके संपर्क में आने से फैलता है | 

ये वायरस आंख, नाक, कान और मुंह के जरिए शरीर में घुस जाता है. इसके अलावा बंदर, चूहे और गिलहरी जैसे जानवरों से भी यह वायरस फैलते है |

खासी और जुकाम से भी फैलता है इसके अलावा ये संक्रमित व्यक्ति के सामना से भी फैलता है | जैसे  संक्रमित व्यक्ति के कपड़े , बिस्तर आदि से |

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ये संक्रमण यौन संपर्क के माध्यम से भी फैलता है | इसका मतलब ये है कि आपको उन जानवरों और लोगों के संपर्क में आने से बचना है, जो मंकीपॉक्स से संक्रमित हैं |  

मंकीपॉक्स के लक्षण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स में आमतौर पर 

  • बुखार 
  • पुरे शरीर पर दाने और गांठ
  •  सिरदर्द
  •  मांसपेशियों (Muscles) में दर्द
  •  पीठ दर्द
  •  सूजी हुई लसीका ग्रंथियां(lymph glands)
  •  ठंड लगना और थकावट आदि शामिल हैं।

बुखार आने के 1 से 3 दिनों के भीतर रोगी को दाने हो जाते हैं, जो अक्सर चेहरे पर शुरू होता है और फिर शरीर के अन्य भागों में फैल जाते हैं।

इस बीमारी के लक्षण 2 से 4 सप्ताह तक दिखते हैं. कहते हैं कि ये अपने आप दूर हो जाते हैं | कोई मामले  गंभीर भी हो सकते हैं |

जिस से मृत्यु भी हो सकती है | WHO के अनुसार ये उन लोगो में ज्यादा गंभीर हो जाता है  जीना की इम्युनिटी कम होती है | 

मंकीपॉक्स का इलाज कैसे किया जा सकता है ?

अभी तक इस बीमारी का कोई भी इलाज और टीका नहीं है।

ये लगभग चेचक की तरह ही होता है तो इसको  रोकने के लिए लगाए जाने वाले चेचक के टीके 85 प्रतिशत प्रभावी साबित हुए हैं।

हालांकि, इस वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद शुरुआत में ही चेचक का टीका लगाया जाना चाहिए, तभी इसे रोका जा सकता है। साथ ही खतरा भी काफी कम हो जाता है।

मंकीपॉक्स से कैसे करें बचाव ? 



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मंकीपॉक्स  से अपना बचाव किया जा सकता है, लेकिन इसमें कितनी सफलता मिलेगी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है ।

स्वयं को मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए आप निम्न उपायों को अपना सकते हैं :-

  1. उन जानवरों के संपर्क में आने से बचें  जो बीमार हैं या जो उन क्षेत्रों में मृत पाए गए हैं जहां मंकीपॉक्स होता है| 
  2. किसी बीमार जानवर के संपर्क में आने वाली किसी भी सामग्री, जैसे बिस्तर, के संपर्क में आने से बचें।
  3. संक्रमित रोगियों को अन्य लोगों से अलग करें जिन्हें संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  4. संक्रमित जानवरों या मनुष्यों के संपर्क में आने के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी से धोना या अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र से साफ करे | 
  5. मरीजों की देखभाल करते समय व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का प्रयोग करें। ग्ल्व्स, मास्क आदि जरूर पहन लें | 

अगर आप किसी के साथ सेक्स करते हैं तो ध्यान रखें कि आपके साथी को मंकीपॉक्स के लक्षण तो नहीं है ।

या विदेश यात्रा का कोई इतिहास तो नहीं है (खासकर वो देश जहाँ फ़िलहाल मंकीपॉक्स के सामने आ रहे हैं या अफ़्रीकी देश)। सेक्स करने के दौरान कंडोम का इस्तेमाल जरूर करें। कंडोम का इस्तेमाल ओरल सेक्स के दौरान भी जरूर करें।

यदि किसी को भी मंकीपॉक्स के लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से  सलाह ले |