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आजादी के बाद भारत के लोगों को मिल चुकी प्रमुख स्वास्थ्य योजनाएं और हेल्थ स्कीम : Svaasthy Yojanaen Aur Helth Skeem

देश की आजादी को 75 साल पुरे हो गए है और और हम 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है | आजादी के भारत ने कई और जंग लडी है ,गरीबी की ,बीमारी ,आतंकवाद शिक्षा और बहुत से जंग लड़ी |

भारत ने कभी भी हर नहीं मानी और एक एक कर सब पर विजय पा रहा है | भारत आज कही आगे निकाल गया है , जिसमें से सबसे जरुरी है हेल्थ और भारत आज हेल्थ सेक्टर में भी काफी एडवांस हुआ है |

भारत ने न सिर्फ ब्रिटिश राज से मुक्ति पाई बल्कि स्मॉलपॉक्स, कुष्ठ रोग, पोलियो और गिनी वॉर्म जैसी बीमारियों से भी खुद को आजाद किया है |

वैक्सीन बनाने और उपलब्ध कराने को लेकर तो आप सब जानते है उस के बारे में बताने  की भी जरूरत नहीं है | हम आपको ऐसी प्रमुख हेल्थ पॉलिसी और स्कीम के बारे में बताने वाले हैं, जो भारत ने पिछले 75 वर्षों में शुरू की हैं | 

राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (National Leprosy Eradication Programme)

भारत सरकार द्वारा देश में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग नियन्त्रण कार्यकम वर्ष 1955 में लागू किया गया था , तथा राजस्थान में यह कार्यकम वर्ष 1970-71 में शुरू किया गया, जिसे वर्ष 1983 में “राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (National Leprosy Eradication Programme)” नाम दिया |

इस प्रोग्राम का लक्ष्य लोगों को लेप्रोसी(कुष्ठ) के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी देना था ताकि इससे होने वाली विकलांगता और फैलाव के खतरे को कम किया जा सके | इस प्रोग्रामसे रोगियों की संख्या कम हुए है |

  राज्य में दिसम्बर 2015 तक 67374 कुष्ठ रोगियों की खोज की गई है | अब तक 66206 कुष्ठ रोगियों का उपचार देकर रोगमुक्त किया जा चुका है | राज्य में वर्तमान में 1168 रोगी उपचार प्राप्त कर रहे हैं  | 

वर्तमान में राज्य में कुष्ठ रोग प्रसार दर 0.16 प्रति दस हजार जनसंख्या है | जबकि कुष्ठ रोग की राष्ट्रीय प्रसार दर 0.69 प्रति दस हजार जनसंख्या है | लोगो में इस की ज्यादा जानकारी न होने के कारण ये अभी भी ये पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुआ है पर अब नियन्त्रण में है | 

पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम (Pulse Polio Immunisation Programme)

पल्स पोलियो इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (PPIP) 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) द्वारा पोलियो के उन्मूलन के बाद भारत ने 1955 पल्स पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसका लक्ष्य 100 प्रतिशत कवरेज देना था |

यह शून्य से पांच वर्ष की आयु के बच्चों को दी जाती है |  स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में पोलियो का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में पाया गया था |

देश में अंतिम पोलियो के मामले की सूचना 13 जनवरी वर्ष 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले से मिली थी | इसके बाद देश में कोई पोलियो का मामला (25 मई वर्ष 2012 तक) नहीं मिला है |

डब्ल्यूएचओ ने 24 फरवरी वर्ष 2012 को भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया है | अब भारत पोलियो मुक्त है | 



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राष्ट्रीय एड्स नीति

1986 में भारत में पहली बार एड्स के मामले का पता चल और तब स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय एड्स समिति का गठन किया | 

एड्स के फैलने के साथ ही भारत में इसके प्रति जागरुकता लाने तथा रोकथाम के उपाय करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम चलाने की जरूरत महसूस होने लगी | ऐसे कार्यक्रम चलाने के लिए एक संगठन की आवश्यकता थी | 

1992 में भारत का पहला राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (1992-1999) शुरू किया गया था और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) कार्यक्रम को लागू करने के लिए गठित किया गया था | आज लोगो में HIV को लेकर जागरुकता गई है | 

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (National Rural Health Mission)

ग्रामीण इलाकों के नागरिकों के लिए बेहतर चिकित्सा सविधाएँ उपलब्ध  करने के लिया सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का आरम्भ वर्ष 2005 में किया था, इसके बाद वर्ष 2013 से इसे ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों के लिए भी आरम्भ किया गया, जिसके बाद इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  (National Rural Health Mission) रख दिया गया |

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आने वाले दोनों राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NHRM) और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NHUM) का सँचालन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन देश की महिलाओं, बच्चों और राज्य के सभी जरुरत मंद आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाती है, जिससे देश भर में सभी ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकेगा | 

मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (Accredited Social Health Activist) 

मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (Accredited Social Health Activist) जिन्हें आशा वर्कर भी कहा जाता है |

भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रायोजित जननी सुरक्षा योजना से संबद्ध एक ग्रामीण स्तर की कार्यकर्त्री (worker) है | आशा वर्कर गरीब महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएँ प्रदानकरती है |

मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता यह योजना आशा वर्कर के द्वारा ही चलती है | यह योजना 2005 में शुरूकी गयी और 2012 तक पूरी तरह क्रियान्वित किया गया | 

नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन (National Health Protection Mission)

सरकार ने एक और योजान शुरू की वो है नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन  (National Health Protection Mission)| इस योजान के अंतर्गत आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजनाये  (PMJAY)आती हैं |

  इस का पहला लक्ष्य भारत के लगभग 50 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना है | 

इसके अलावा, यह लाभार्थियों(beneficiaries) को 5 लाख रुपए की औसत कवरेज राशि देती है |  यह  दवाओं, अस्पताल में पहले से भर्ती होने की लागत(cost) और चिकित्सा उपचार लागत(medical treatment cost) को कवर करता है | 

PMJAY स्कीम के लाभ

  • यह इसकी सभी लाभार्थियों (beneficiaries) को कैशलेस सुविधा देती है |  
  • यह अस्पताल में भर्ती होने से पहले और अस्पताल में भर्ती होने के बाद के समय के दौरान लाभार्थी(beneficiaries) के परिवहन भत्ते (transport allowance ) को कवर करता है | 
  • यह बीमा पैकेज की तहत ही डे-केयर के खर्चों को कवर करता है | 
  • साथ ही, यह लाभार्थी की पहले से मौजूद बीमारियों को भी कवर करता है, जिन्हें PMJAY स्कीम  के तहत शामिल किया जाता है |